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अगरबत्ती, धूप का उधोग कैसे शुरू करे

 अगरबत्ती, धूप आदि (Incense sticket)

भारत एक धर्मप्रधान देश है। हमार देश में कोई भी धर्म क्यों न हो. उसमेंअगरबत्ती जलाने का प्रचलन है। सुबह-सबरे नहा-धोकर अधिकांश लोग अपने घरों में भगवान की मूर्ति या तस्वीर के आगे अगरबत्ती जलाते हैं या दुकानदार अपनी दुकान में पूजा करते हैं। न केवल भारत, बल्कि भारत के अधिकांश पड़ोसी देश नेपाल, श्रीलंका, बर्मा, फीजी, मारीशस, लंदन, मलेशिया, अफ्रीका,तिब्बत, भूटान" आदि सहित अधिकांश देशों में पूजा के लिए अगरबत्तियों के इस्तेमाल का प्रचलन है। यही कारण है कि इसकी मांग तथा खपत में कभी कमी नहीं आती। इस उद्योग को आप मात्र 750 से 1000 रुपए की पूंजी से शुरू कर सकते हैं। अगरबत्ती बनाने के लिए किसी भी प्रकार की मशीनरी की आवश्यकता नहीं होती। अगरबत्ती का उद्योग मैसूर, महाराष्ट्र, चेन्नई तथा अजमेर में खासा प्रचलित है। भारत में अगरबत्ती के 200 से भी अधिक प्रमुख निर्माता हैं जिनमें से अधिकांश मैसूर और बंगलोर में हैं।

अगरबत्ती बनाने के लिए सामग्री

विभिन्न किस्म की सुगंधित लकड़ियां, सुगंधित तेल, जड़ें, पेड़ों की छालें, कृत्रिम सुगंध, रेजिन, बालसम, मैदा लकड़ी और पिसा हुआ कोयला। अगरबत्ती बनाने के लिए इस्तेमाल होनेवाली तीलियां दो किलो वजन के अनुपात में पंखा बनानेवालों से आसानी से मिल जाती हैं। बढ़़िया तीलियां एक किलो के बंडल में 2500 से 3000 तक होती हैं। अगरबत्तियों की भिन्न-भिन्न सुगंध, रंग और जलने का समय होता है। अगरबत्ती बनाने के लिए निम्न वस्तुओं का प्रयोग होता है:

लकड़ी अगर और चंदन

खस और कपूर कचरी जड़

छाल तेजपत्ता और दालचीनी

देवदार, पचौली और मरजोरम पत्ती

फूल गोंद और रेजिन

गुलाब, चंपक और लौंग

लोबान, शिलाजीत आदि

इलायची और जावित्री

वुडगम, मैदा और लकड़ी

शोरा, लकड़ी का कोयला, रंग आदि

निर्माण विधिः सबसे पहले अगरबत्ती के ऊपर लगाया जानेवाला मसान तैयार किया जाता है। सामान्य किस्म की अगरबत्ती बनाने के लिए निम्न बीज भरावन अन्य पदार्थका इस्तेमाल किया जाता है:

चंदन की लकड़ी 30 प्रतिशत

खस 5%

ओलीबानम या लोबान 20%

काली अगर 20%

कपूर कचरी 5%

लकड़ी का कोयला व अन्य पदार्थ 10%

फूल और पत्तियां 10%

इन सभी घटकों को ऊपर दी गई मात्रा के अनुसार, अच्छी तरह हिलाकर मिला लिया जाता है। इसके बाद महीन छन्ने में छानकर इस मिश्रण का आट की तरह गूंथ लें। गुंथे हुए इस मसाले को एक ढलवां चौकी पर फैला लिया जाता है।तीलियों के गट्ठे को हाथ में पकडकर चौकी पर फैलाए मसाले पर रगड़। दिया जाता है। मसाला रगड़ने से पहले तीलियों के गट्ठे पर डेढ़ से दो इंच का जार छोड़ दी जाती है। छोड़ी हुई जगह के अलावा तीली पर पूरी तरह गुथा  मसाला चडा जाता है। तीली पर मसाला चढ़ाते समय इसको रंग-बिरंगा बनान के लिए रंग तथा सुगंधित पदार्थों को भी मिला दिया जाता है। कुछ देर में तीलियाँ के सुखने के बाद इन्हें डिब्बे में पैक कर लिया जाता है। सामान्य तौर पर अधिकांश लोग सस्ती किस्म की अगरबत्ती का उत्पादन करते हैं। इन अगरबत्तियों को सस्ती किस्म के चंदन की लकडी या लकड़ी के कोयले में 50 प्रतिशत वुडगम मिलाकर तैयार किया जाता है। आमतौर पर यह परी तरह जल नहीं पाती और न ही इससे अच्छी सुगंध निकल पाती है।  अगरबत्ती एक बार जलने के बाद बीच में बुझती नहीं। अच्छी वशव दन तो बेहतर अगरबति का गुण है ही। बढ़िया किस्म की अगरबत्ती बनाने के लिए सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है.


लकड़ी का कोयला

सफेद चंदन का बुरादा

पिसा हुआ गुगल

25 ग्राम

25 ग्राम

25 ग्राम

पिसी हुई राल

20 ग्राम

इस मिश्रण को पहले के समान बताए तरीके से छानकर ढलवां चौकी पर फैला लिया जाता है और तीलियों को इसमें डालकर उन्हें सुखा लिया जाता है। अधिकांश लोग स्वयं अगरबत्तियां न बनाकर निम्नलिखित पतों से अगरबत्तियां मंगाकर मनचाहे किस्म की अगरबत्ती बनाकर बेच रहे हैं:

हवन सामग्री तथा धूपबत्ती

भारत जैसे देश में प्रत्येक रीति-रिवाज पर हवन सामग्री तथा धूपबत्ती का बहुतायत से उपयोग होता है। चूंकि इन सामग्रियों की खपत सारे साल रहती है इसलिए इसको बनाने का काम हमेशा चलता रहता है। इस उद्योग को बहुत थोड़ी लागत के साथ शुरू किया जा सकता है क्योंकि इसको बनाने के लिए किसी भारी-भरकम मशीन या उपकरण आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती। हवन सामग्री तथा धूपबत्ती के निर्माण के लिए सिंवई बनानेवाली मशीन के समान एक मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। हाथ से चलनेवाली यह मशीन कम दामों पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

धूपबत्ती बनाने के लिए सामग्री

धूप लकड़ी, घी या नारियल का तेल, गुग्गुल, मुश्क कपूर, चंदन का बुरादा, पापड़ी, अगर-तगर, बाल छड़, सुगंध आदि।अच्छी गुणवत्ता की धूपबत्ती बनाने के लिए निम्न सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है:

गुग्गुल

धूप लकड़ी

घी या तेल

200 ग्राम

1 किलोग्राम आवश्यकतानुसार

मुश्क कपूर 10 ग्राम

नि्माण विधिः धूप लकड़ी के बारीक टुकड़े काट लें। इन बारीक टुकड़ां भाबली में मूसल से अच्छी तरह कूटें। इस लकड़ी को इतना कूटें कि यह के  लकड़ी  गुुथे लकड़ी कूटने से पहले मूसल के कोने पर थोड़ा सा घी या तेल लगा लेना चाहिए ताकि लकड़ी कूटते समय मूसल में लकड़ी चिपके नहीं। एक घंटे की कुटाई के बाद यह मिश्रण गुंथे हुए आरे की । तरह हो जाता है। इस मिश्रण को निकालकर अलग रख लें। इसके बाद इसी ओखली में गुग्गुल डालकर उसकी भी बारीकी से कुटाई कर ले। घूप लकड़ी । और गुग्गुल को अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद इस मिश्रण को दोबारा। ओखली में डालें और फिर से कुटाई करें। कुटाई के दौरान मिश्रण में और नारियल का तेल डालते रहें। अंत में जब यह मिश्रण गुंथे हुए आटे की तरह सख्त। हो जाए तो इसमें मुश्क कपूर डाल दें। धूपबत्ती बनाने के लिए इसी मिश्रण आवश्यकता पड़ती है। अब धूपबत्ती बनाने की मशीन में इस मिश्रण को डालकर इसे हाथ से चलाए जिससे मिश्रण की बत्तियां बन जाती हैं। आमतौर पर धूपबत्ती की लंबाई 7.,5 सेंटीमीटर रखी जाती है। बेहतर किस्म की धूपबत्ती बनाने के लिए निम्न सामग्री के मिश्रण की आवश्यकता होती है:

सफेद चंदन का बुरादा
250 ग्राम
यारा-यारा क्रिस्टल
लोबान
5 ग्राम
35 ग्राम
गम अरेबिक पाउडर
5 ग्राम
इस सामग्री को मिश्रित करके पूर्व में बताई गई विधि के अनुसार धूपबत्ती का निर्माण किया जा सकता है।
हवन सामग्री बनाने की सामग्री 
पूजा या धार्मिक समारोहों, हवन या यज्ञ के लिए हवन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। हवन सामग्री को अनेक प्रकार की ऐसी जड़ी-बूटियों से निर्मित किया जाता है। जिन्हें जलाने से सुगंधित तथा प्रदूषण न फैलानेवाला हानिरहित धुआं निकलता है। उत्तम हवन सामग्री बनाने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाए:
धूप लकड़ी
लोबान 500 ग्राम

गुग्गुल  125 ग्राम
मुश्क कपूर 12 ग्राम
मुश्कवाला 100 ग्राम
कपूर कचरी 125 ग्राम
चंदन का बुरादा 125 ग्राम
अगर
125 ग्राम
बाल छड़
50 ग्राम
पापड़ी घी
संदल तेल 100 ग्राम

निर्माण विधिः उपर्युक्त सभी सामग्री को महीन पाउडर के रूप में अच्छी तरह कूट लें। इसके बाद इस मिश्रण को किसी बारीक छन्ने से छान लें। इस मिश्रण में घी मिलाएं तथा संदल तेल छिड़क दें। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं ताकि समस्त सामग्री एक समान रूप से मिश्रित हो जाए। अब आपके पास सुगंधित हवन सामग्री बेचने के लिए तैयार है। अपनी इच्छानुसार इस सामग्री
को भिन्न-भिन्न प्रकार के पैकेटों या डिब्बों में पैकिंग कर लें।

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